प्रयागराज, नवम्बर 21 -- वाणी प्रकाशन की ओर से शुक्रवार को प्रकाशन के सिविल लाइंस स्थित कार्यालय में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। हर्षमणि सिंह ने काव्य पाठ करते हुए 'हर कविता जिंदा रहना चाहती है पर हर कविता के पास, किसी किताब के हरफ में खूंटे की तरह बंधे रहने का खिताब हासिल नहीं' पंक्तियां सुनाई। महक जौनपुरी ने गीत 'मेरे साथ रहेंगे परछाइयां बनकर, मेरे तन मन को महका देंगे पुरवाइयां बनकर' की प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध किया। कवि विवेक सत्यांशु ने अपनी कविताएं सुनाकर किताबें पढ़ने के अनुभव से उसे जोड़ा, उन्होंने पंक्तियां 'जो भूख के आंदोलन में अपने को शामिल होने की सिफारिश करते हुए पाए गए, जो खून से सदा डरते थे' सुनाई। कवि श्लेष गौतम ने 'गिरने के इस दौर का आंखों देखा हाल, पारा जाड़े में गिरा नीयत पूरे साल' पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं को भाव...
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