लखनऊ, दिसम्बर 13 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता भारतीय सांस्कृतिक सम्बंध परिषद और भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की ओर से गजल संध्या सजी। मासिक क्षितिज श्रृंखला के अंतर्गत शुक्रवार शाम को इलियास खान ने इस गजल संध्या को यादगार बना दिया। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में आयोजित संध्या में श्रोताओं को एक से बढ़कर एक गजलें सुनने का अवसर मिला। लखनऊ एवं सेनिया घरानों से ताअल्लुक रखने वाले इलियास खान ने नदीम चांदपुरी की लिखी आप आये तो बहारों ने लुटाई खुशबू, फूल तो फूल हैं कांटों से भी आई खुशबू गजल सुनायी। इसके बाद उन्होंने परवीन शाकिर की लिखी कूबकू फैल गई बात शनासाई की, बशीर बद्र की यूं ही बेसबब न फिरा करो, कोई शाम घर भी रहा करो ,सुनाकर तालियां बटोरी। इलियास खान ने दाग देहलवी का कलाम उज्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं, अहमद वसी की लिखी गजल कोई शिकव...
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