कानपुर, नवम्बर 14 -- कानपुर पुस्तक मेला में उत्प्रेरणा समिति ने किया आयोजन, करतल ने पढ़ा..मन की दूषित नदी नर्मदा हो गई कानपुर वरिष्ठ संवाददाता कानपुर पुस्तक मेला में शुक्रवार को उत्प्रेरणा समिति ने कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया। कवि करतल किशोर ने पढा, ''मन की दूषित नदी नर्मदा हो गई'' तो दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। कवि शिवांश शुक्ल सरस ने ''सिर्फ पत्थर से पुल नहीं बनता राम सीता के मन मिले होंगे'' पढा तो उन्हें खूब वाहवाही मिली। जीआईसी, चुन्नीगंज में देर शाम तक चले कवि सम्मेलन में कवियों के गीतों, मुक्तक, गजलों एवं छन्दों ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया | कवि अमित ओमर ने ''अगर मुलाकात कभी केजरी से हो जाए तो खासी वाली अच्छी सी दवाई पूछ लेना'', कवि प्रशांत द्विवेदी मृदुल ने ''वो जिसके है पिता चप्पल बनाते, उसी के पांव में चप्पल...