दरभंगा, फरवरी 22 -- दरभंगा। डॉ. नागेंद्र झा स्टेडियम में आयोजित भगवदगीता प्रवचनमाला के छठे दिन के सत्र में राजयोगिनी कंचन दीदी ने बताया कि भगवान गीता ज्ञान के माध्यम से बहुत बड़ी प्रेरणा देते हैं। वे कहते हैं कि व्यक्ति अगर गृहस्थ व्यवहार में रहते हुए भी बुराइयों का त्याग करता है, विकारों का संन्यास करता है तो ऐसा गृहस्थी भी संन्यासी मानने योग्य है। कोई सन्यास धर्म अपना ले, घर त्याग दे, परिवार त्याग दे, समाज से दूर चला जाए लेकिन इसके बाद भी अगर उसने मन से विकारों का त्याग नहीं किया है तो वह भी यथार्थ में सन्यासी मानने योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जीवन में रहते दुखों से, बुराइयों से, विकारों से मुक्त अवस्था को ही जीवन मुक्त अवस्था कहा गया है। कार्यक्रम की शुरुआत दरभंगा मंडल कारा अधीक्षक स्नेहलता, भाजपा चिकत्सिा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक ड...
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