नई दिल्ली, जनवरी 27 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि लोकसेवकों द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में अपराध किए जाने के आरोप वाली याचिका के साथ हलफनामा होना जरूरी है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने मुख्य न्यायाधीश द्वारा सभी उच्च न्यायालयों को भेजे गए एक पत्र का उल्लेख किया। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया था कि न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों पर तब तक विचार नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि उनके साथ हलफनामा न हो। पीठ ने कहा कि जब किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ आरोपों की प्रामाणिकता को हलफनामे द्वारा समर्थित करने की जरूरत होती है, तो लोकसेवकों के मामले में भी इसी तरह की जरूरत पर जोर देने का समान औचित्य मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को बीएनएसएस की धारा-175 की उपधारा (3) के तह...