नई दिल्ली, जनवरी 19 -- सीके बिरला अस्पताल की गायनोकॉलोजिस्ट डॉ. तृप्ति रहेजा कहती हैं कि 'अभी तो मेरी उम्र ही क्या है?' या 'मैं स्क्रीनिंग के लिए अभी बहुत छोटी हूं, 'मैं अभी जवान हूं', मुझे स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं'- ये कुछ ऐसे वाक्य हैं, जो अक्सर क्लिनिक में सुने जाते हैं। दुर्भाग्यवश महिलाओं की यही सोच कई बार 'रोग की पहचान' में देरी कर देती है, और कुछ मामलों में जान भी ले सकती है। ज्यादातर लोग आज भी स्वास्थ्य को उम्र की कतार में खड़ा कर देते हैं, यह भूलकर कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) किसी महिला की उम्र देखकर उसे अपना शिकार नहीं बनाता है, बल्कि यह उन खामोश बदलावों का नतीजा है जो शरीर में सालों पहले शुरू हो सकते हैं। आज के समय में बदलती जीवनशैली और पर्यावरण के बीच यह धारणा न केवल पुरानी पड़ चुकी है, बल्कि बेहद जोखिम भरी भी है।...