वाराणसी, नवम्बर 2 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। 'मगन भई तुलसी राम गुन गाइके...' और 'सब कोऊ चली डोली पालकी रथ जुड़वाय के' आदि विवाह गीत रविवार को गंगा तट पर नेमी महिलाओं की भीड़ में मुखर हुए। ब्रह्ममुहूर्त में गंगा स्नान का नियम पालन करने वाली महिलाएं गोधूली बेला में भी अस्सी से तुलसी घाट के बीच जुटीं। गंगा-वरुणा संगम स्थित आदिकेशव मंदिर में तुलसी विवाह पर आयोजन हुआ। आदिकेशव मंदिर में तड़के ही तुलसी विवाह का अनुष्ठान पं. विद्याशंकर त्रिपाठी के मुख्य आचार्यत्व में हुआ। उधर, गंगा तट सहित मंदिरों एवं घरों में गन्ने का मंडप सजाकर देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम को ऋतु फल अर्पित किए गए। पूजा के स्थान पर रंगोली बनाई गई। तुलसी के पौधे का गमला और चौरा गेरू आदि से सजाकर ईख का मंडप बनाया गया। उसके ऊपर सुहाग की प्रतीक चुनरी ओढ़ाई गई। गमले को साड़ी ओढ़ाकर और...