बागपत, जनवरी 13 -- बागपत। मकर संक्रांति केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि ग्रहों की एक ऐसी दुर्लभ जुगलबंदी है, जो दशकों में कभी-कभार देखने को मिलती है। 23 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह संयोग बन रहा है, जहां सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और षटतिला एकादशी की पुण्य तिथि एक ही दिन मिल रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पंड़ित गौरीशंकर शर्मा ने बताया कि सूर्य देव का बाघ पर सवार होना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में विश्व पटल पर भारत की सैन्य शक्ति और राजनीतिक पराक्रम में भारी वृद्धि होगी। बाघ साहस और निडरता का प्रतीक है। चूंकि एकादशी तिथि 14 जनवरी को सूर्योदय से लग रही है, इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालु 14 जनवरी को ही व्रत रखेंगे। जो लोग केवल संक्रांति का स्नान करना चाहते हैं, वे उदयातिथि के अनुसार 15 जनवरी की सुबह भी पवित्र नदियों में डुबकी लग...