नई दिल्ली, फरवरी 6 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह 'भुलाए जाने के अधिकार' को ऑनलाइन समाचार पर लागू किया जा सकता है या नहीं इस मुद्दे की पड़ताल करेगा। अदालत ने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत प्रेस की आजादी के अधिकारों और अनुच्छेद-21 के तहत किसी व्यक्ति के सम्मान और भुलाए जाने के अधिकार के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने एक मीडिया हाउस की एक याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई। याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत के रोक लगाने वाले एक आदेश को बरकरार रखा था। आदेश में उस आरोपी से जुड़ी खबरों के प्रसारण और प्रकाशन पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था, जिसे एक आपराधिक मामले में आरोप-मुक्त कर दिया गया है। सुप्रीम...
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