वाराणसी, नवम्बर 25 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पेशे से हकीम और दिल से शायर नजीर ने जो भी गढ़ा वह हर किसी के लिए नजीर बन गया। 25 नवंबर को नजीर बनारसी की जयंती की पूर्व संध्या पर सोमवार को बनारस के साहित्यकारों ने बेनजीर शायर को न सिर्फ उनकी शायरी के जरिये याद किया। बल्कि उनके इल्मी कद को याद करते हुए कई बेबाक नजीरें भी पेश कीं। नवगीतकार डॉ.अशोक सिंह उनके शेर 'अंधेरा मांगने आया था रौशनी की भीख, हम अपना घर न जलाते तो और क्या करते' को याद करते हुए कहते हैं मोहब्बत, भाईचारा, देश प्रेम नज़ीर बनारसी की शायरी में शामिल हैं। मोहब्बत के नाज़ुक एहसासों और ज़रूरतों को नज़ीर बड़े सलीके से शायरी और ग़ज़लों की शक्ल दिया करते थे। नवगीतकार सुरेंद्र वाजपेयी कहते हैं उनका शेर 'दुनिया है इक पड़ाव मुसाफिर के वास्ते, इक रात सांस ले के चलेंगे यहां से हम' जिंदग...
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