रांची, मार्च 29 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आदिवासी समाज, धर्मांतरण और आरक्षण से जुड़े अहम मुद्दे को उठाया। उन्होंने महान आदिवासी नेता बाबा कार्तिक उरांव की ओर से 1967 में संसद में प्रस्तुत डिलिस्टिंग प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को अनुसूचित जनजाति का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इस दौरान चंपाई सोरेन ने धर्म परिवर्तन करने वालों को आरक्षण ना देने के पीछे तर्क भी दिए हैं। आइए जानते हैं। चंपाई सोरेन ने अपने पोस्ट में कहा कि 1967 में बाबा कार्तिक उरांव ने संसद में एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें यह मांग की गई थी कि जो व्यक्ति ईसाई या इस्लाम धर्म अपना ले, उसे अनुसूचित जनजाति के आरक्षण से वंचित किया जाए। इस प्रस्ताव को तत्कालीन केंद्र सरकार ने संसदीय ...
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