नई दिल्ली, फरवरी 12 -- वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में बजाने को अनिवार्य घोषित किए जाने के फैसले को जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने धर्म की स्वतंत्रता पर खुला हमला बताया है। केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों में इसके सभी अंशों की धुन बजाने को अनिवार्य कर दिया है। मदनी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को अत्यंत दुखद तथा नागरिकों पर जबरन थोपा गया बताया है।धार्मिक स्वतंत्रता पर गहरी चोट करने का प्रयास मदनी ने कहा कि यह न केवल एक पक्षपातपूर्ण फैसला है बल्कि नागरिकों की उस धार्मिक स्वतंत्रता पर गहरी चोट करने का प्रयास है जो देश के संविधान ने उन्हें प्रदान की है। उन्होंने कहा कि अब यह दुखद सच्चाई पूरी तरह सामने आ गई है कि इन लोगों को देश की प्रगति और जनता की समस्याओं से कोई ल...