नई दिल्ली, फरवरी 2 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार और भारत के जनगणना आयुक्त को जनगणना-2027 में जाति की गणना सिर्फ स्व-घोषणा के बजाय एक सत्यापन प्रणाली आधार पर करने के सुझाव पर विचार करने को कहा। साथ ही अदालत ने जनगणना में नागरिकों की जाति संबंधी आंकड़ों को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इसमें प्रासंगिक मुद्दा उठाया है, ऐसे में सक्षम प्राधिकारियों को जनगणना अधिनियम-1958 के तहत इन सुझावों पर विचार करना चाहिए। पीठ ने याचिकाकर्ता व शिक्षाविद आकाश गोयल से कहा कि जाति संबंधी आंकड़ों की पहचान के लिए पहले से तय कोई आंकड़ा नहीं है। पीठ ने कहा कि जनगणना की प्...
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