नई दिल्ली, अगस्त 30 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने रेप के आरोपी एक व्यक्ति की इस दलील को घृणित करार दिया कि उसके खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा रद्द करना नाबालिग पीड़िता के हित में होगा, जिसे नहीं तो कलंक का सामना करना पड़ेगा। जस्टिस गिरीश कठपालिया ने 29 अगस्त को पारित फैसले में कहा कि कलंक गलत कृत्य की शिकार पीड़िता पर नहीं, बल्कि गलत काम करने वाले पर लगना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने आरोपी की याचिका खारिज करते हुए उस पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया। जस्टिस कठपालिया ने कहा, याचिकाकर्ता के वकील की दलील है कि वर्तमान कार्यवाही को रद्द करना अभियोक्ता के हित में होगा, अन्यथा उसे कलंक का सामना करना पड़ेगा। मैं इस दलील को घृणित मानता हूं। उन्होंने कहा, कलंक रेप की शिकार पीड़िता पर नहीं, बल्कि गलत काम करने वाले अपराधी पर लगना चाहिए। समाज की मानसिकता में आ...
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