रांची, मार्च 23 -- रांची, वरीय संवाददाता। मधुमक्खी पालन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का प्रमुख साधन हो सकता है। आकर्षक और लाभदायक व्यवसाय के रूप में मधुमक्खी पालन से खेती में भी अपेक्षित सहयोग मिलता है। परागण की वजह से फसलों की उत्पादकता बढ़ती है और मधुमक्खी पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। मोरहाबादी के रामकृष्ण मिशन आश्रम के दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र में रविवार को राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड की ओर से आयोजित सात दिनी प्रशिक्षण शिविर के समापन पर आयोजित समारोह में विशेषज्ञों ने किसानों को इसकी जानकारी दी। केवीके के वरीय वैज्ञानिक डॉ अजीत सिंह ने बताया कि किसानों को मधुमक्खी पालन की तकनीक, देखभाल, सुरक्षा एवं बाजार की बुनियादी जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ राजेश कुमार व राजेंद्र कुमार महतो ने किया।
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