नई दिल्ली, फरवरी 7 -- केरल हाईकोर्ट ने कहा कि कानून, नियम धर्म, जाति या समुदायों के बीच झगड़ा करने का जरिया नहीं बनने देना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज को जोड़ने वाली ताकत के तौर पर काम करना चाहिए। न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की पीठ ने यह टिप्पणी एक याचिका खारिज करते हुए की। अदालत ने कहा कि इस मामले में ईसाई पादरियों को तंत्री द्वारा अतिथि के रूप में मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी, जो 'अधिकार के रूप में मांगे गए प्रवेश' से बिल्कुल अलग है। पीठ ने कहा कि ऐसा अनुमति-आधारित और औपचारिक प्रवेश अधिनियम, उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या मंदिर की स्थापित परंपराओं और रीति-रिवाजों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। अधिनियम मंदिर में सभी के प्रवेश की अनुमति देता है अदालत ने कहा कि केरल हिंदू सार्वजनिक पूजा स्थल (प्रवेश प्र...