अलीगढ़, दिसम्बर 9 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के राजीव गांधी सेंटर फॉर डायबिटीज ऐंड एंडोक्राइनोलॉजी के डॉ. हामिद अशरफ ने बताया कि इंसुलिन पंप की सीमित उपलब्धता पर चिंता जताई। उन्होंने इंसुलिन थेरेपी टाइप-वन डायबिटीज के लिए सबसे प्रभावी और रोगी-अनुकूल उपचार बताया। कानपुर में आयोजित टाइप-1 डायबिटीज पर तीसरे नेशनल कॉन्क्लेव (टाइईयूपी 2025) में "भारत में इंसुलिन पम्प की बाधाएं" विषय पर डा. हामिद ने कहा इंसुलिन पम्प बेहतर ग्लूकोज नियंत्रण, जटिलताओं में कमी और जीवन-गुणवत्ता में सुधार देता है, फिर भी भारत में इसका उपयोग लागत अधिक होने और सामाजिक-मानसिक झिझक के कारण बहुत सीमित है। कई योग्य बच्चे, युवा और कुछ गंभीर टाइप-टू डायबिटीज वाले मरीज भी महंगी डिवाइस और कंज्यूमेबल खर्च वहन न कर पाने के कारण इसका लाभ नहीं उठा पाते...