वरिष्ठ संवाददाता, फरवरी 25 -- नाम की स्पेलिंग में 'आई' और 'ई' की मामूली सी त्रुटि के कारण महिला को परिवारिक पेंशन पाने के लिए 45 साल तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। अंत में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद नगर निगम की लापरवाही का शिकार हुए इस परिवार को इंसाफ की किरण तो दिखी लेकिन तब तक याची पत्नी, उनके दोनों पुत्र, एक पुत्रवधु स्वर्ग सिधार चुके हैं। दूसरी पुत्र वधु ने संघर्ष को जारी रखा। आखिर अब उम्मीद जागी है कि 1980 से वर्ष 2015 तक उनकी सास को देय पारिवारिक पेंशन मिल सकेगी। शिखर नाथ शुक्ला डीपीएस नगर निगम इंटर कॉलेज, नवाबगंज में शिक्षक थे। वह 1975 में रिटायर हो गए थे। 1980 तक उन्हें नगर निगम से पेंशन मिलती रही। लेकिन जब उनकी पत्नी ने नगर निगम में पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया तो उसमें पति के नाम की स्पेलिंग में आई की जगह ई हो गया। शिखर ...
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