वाराणसी, अक्टूबर 5 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने आधुनिक हिंदी आलोचना की नींव रखी और इसे वैज्ञानिक तथा व्यवस्थित रूप प्रदान किया। उन्होंने सैद्धांतिक आलोचना (रस मीमांसा) और व्यवहारिक आलोचना दोनों पर कार्य किया, जिसमें उन्होंने काव्य को लोक हृदय तथा मानव भावों के विकास से संयुक्त किया। स्वागत करते हुए संस्थान की अध्यक्ष साहित्यकार डॉ. मुक्ता ने कहा कि आचार्य शुक्ल अपने समय के जागरूक अन्वेषक थे। आलोचना के क्षेत्र में उन्होंने नई रचनात्मक उद्भावनाओं को जन्म दिया। आचार्य शुक्ल की 141वीं जयंती पर रवींद्रपुरी स्थित आचार्य रामचंद्र शुक्ल साहित्य शोध संस्थान में शनिवार को 'आचार्य रामचंद्र शुक्ल और हिंदी आलोचना विषयक संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुरेन्द्र प्रताप ने कहा कि उनकी समीक्षा पद्धति परवर्ती आलोचकों के लिए प...
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