बेगुसराय, मार्च 10 -- नावकोठी, निज संवाददाता। होली नजदीक है। रंगों के त्योहार होली की तैयारी शुरू है। बाजारों में चहल पहल भी बढ़ गयी है। खेतों में लगी फसलों पर सुनहरा रंग भी चढ़ने लगा है। चूंकि होलिका दहन पर नवान्न भी पका कर खाकर लोग होली पर्व को शुभ मानते हैं किन्तु होली के स्वागत में सप्ताह दस दिन पूर्व से होने वाले पारंपरिक फगुआ गीत के बोल व ढोलक की थाप सुनाई नहीं पड़ती है। पारंपरिक गीतों से गांव की गलियां-मुहल्ले गूंजते रहते थे। बच्चे-बुजुर्ग सब में होली का उत्साह देखते ही बनता था। कहीं होली खेले रघुवीरा अवध में होली खेले रघुवीरा, किनका हाथ कनक पिचकारी किनका हाथ अबीर झोली तो कहीं जोगिरा सारारारा...। ढोलक व झाल की आवाज सुनते ही लोग सुनने व गाने के लिए दौड़ पड़ते। जोगिरा के बीच बीच में वाह भाई वाह एवं सत्य है जी की आवाज मिलाते थे। कहीं ...
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