धनबाद, फरवरी 24 -- धनबाद, वरीय संवाददाता 24 फरवरी मंगलवार से होलाष्टक प्रारंभ हो रहा है। इसके साथ ही सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के समय मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है। शास्त्रों में फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। खड़ेश्वरी मंदिर के पुजारी राकेश पांडेय बताते हैं कि ज्योतिष शास्त्र में होली के आठ दिन पूर्व से पूर्णिमा तक आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। मान्यता है कि होलाष्टक के प्रथम दिन ही महादेव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। इस काल में हर दिन अलग-अलग ग्रह उग्र रूप में होते हैं। इसलिए होलाष्टक में शुभ कार्य नहीं करते हैं। राकेश पांडेय बताते हैं कि इन आठ दिनों में शादी-विवाह, भूमि पूजन, गृह प्रवेश सहित नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार...