पीटीआई, अगस्त 19 -- इस साल मानसून जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने पहाड़ों की संवेदनशीलता को फिर से उजागर किया है। मौसम विशेषज्ञों ने भविष्य के लिए चेतावनी दी है कि इन घटनाओं से पता चलता है कि "सामान्य" श्रेणी में आने वाली मौसमी बारिश हमेशा सुरक्षित संकेत नहीं देती। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगस्त 17 तक के आंकड़े दिखाते हैं कि कई जिलों में जहां सामान्य या कम बारिश दर्ज हुई, वे भीषण हादसों की चपेट में आए। उदाहरण के लिए, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, कठुआ और उत्तराखंड का उत्तरकाशी। किश्तवाड़ में इस बार अब तक केवल 86.5 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 301.5 मिमी से 71 प्रतिशत कम है, लेकिन 14 अगस्त को आए बादल फटने से कम से कम 60 लोगों की मौत और कई लोग लापता ...
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