नई दिल्ली, जनवरी 16 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना के अधूरे हिस्से के ठेकेदार के अनुबंध को रद्द करने पर एनएचएआई के फैसले पर लगी रोक हटा दी है। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की पीठ ने कहा कि नागरिकों को सुचारु आवागमन के लिए पूरी तरह निर्मित राजमार्ग से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एनएचएआई किसी अन्य इकाई को नियुक्त करने के लिए नई निविदा जारी कर सकता है। एनएचएआई की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि ठेकेदार को 2024 में तीन पैकेज का ठेका दिया गया था, लेकिन उसने काम पूरा नहीं किया। परिणामस्वरूप, 794 किलोमीटर लंबी परियोजना में से 87 किलोमीटर हिस्सा अधूरा रह गया, जिससे यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। विवाद गुजरात के...
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