नई दिल्ली, जनवरी 2 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने लूट के एक मामले में आरोपी को बरी किए जाने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए अभियोजन की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बरी के आदेश में हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है, जब निचली अदालत का फैसला स्पष्ट रूप से गलत या तथ्यों से परे हो। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने नवंबर 2014 में सत्र अदालत द्वारा पारित बरी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि कानून का स्थापित सिद्धांत है कि बरी के खिलाफ अपील पर उच्च न्यायालय को अत्यंत सावधानी से विचार करना चाहिए और प्रत्येक तथ्य व साक्ष्य का गहन परीक्षण करना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस मामले में सत्र अदालत ने उपलब्ध सबूतों और गवाहों के बयान का समुचित मूल्यांकन कर आर...