धनबाद, सितम्बर 29 -- उंचे- उंचे पंडाल, दिव्य प्रतिमाएं, रौशनी से नहाती शहर की सड़कें और गलियां, मेला व झूले , कानों में गुंजते देवी दुर्गा की स्तुतियां, ढाक, ताल, शंख । ह्दय में भक्ति भाव और आंखों में उल्लास यह सब कुछ दुर्गोत्सव की कहानी बयां कर रही हैं। यह दुर्गोत्सव ही है जब अपने शहर में धनबाद के पंडाल व प्रतिमाओं के रूप में झारखंड और बंगाल के सम्मिलित संस्कृतियों को समावेश देखने को मिलता है। शहर में हर पंडाल कुछ संदेश दे रहा है, प्रत्येक प्रतिमांए अलग- अलग शैली का बखान कर रही है। झारखंडी संस्कृति से सजा तेतुलतल्ला मैदान का पूजा पंडाल : तेतुलतल्ला मैदान का पूजा पंडाल झारखंड की समृद्ध संस्कृति का दर्शा रहा है। बाहर से कास व अन्य चिजों से सजा पंडाल देखते ही बन रहा है। बीच में अर्धनारेश्वर शिव, भगवान बिरसा मुंडा और अलग - बगल झारखंड की परंप...
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