गंगापार, जुलाई 22 -- प्रतापपुर, हिन्दुस्तान संवाद। जब मिट्टी की गंध सुरों में घुलती है, तब लोककला जन्म लेती है। भारत की आत्मा गांवों में बसती है और इन गांवों की आत्मा लोक कलाकारों और लोक कलाओं में धड़कती है। वे गीत जो पीढ़ियों से विरासत में मिलते आए, वे नृत्य जो गांव, खेत- खलिहानों, गली- चौबारों से अलबेले निकले और जन की थकान मिटाते हैं, वे रंग जो पर्वों को जीवंत करते हैं, यही है हमारी लोक संस्कृति की पहचान जिसे हमें मिटने नहीं देना है। अपने अतिथीय उद्बोधन के दौरान उक्त बातें भारतीय लोक कला महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रख्यात रंगकर्मी अतुल यदुवंशी नें प्रतापपुर में 'माटी की महक और लोक कलाक़ारों का संघर्ष विषयक एक वृहद संगोष्ठी में कहा। प्रदेश अध्यक्ष कमलेश चन्द्र यादव, भारतीय लोक कला महासंघ (महिला प्रकोष्ठ) की प्रदेश अध्यक्ष सुमित्रानंदन...
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