नई दिल्ली, फरवरी 14 -- गए गुरुवार को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी जब आरोपों की झड़ी लगा रहे थे, तब मुझे बेसाख्ता मनमोहन सिंह याद आ रहे थे। राहुल के आरोपों पर तो लोकसभा पीठ की कैंची चल गई, लेकिन मनमोहन सिंह से जुड़े दृष्टांतों के जरिये मौजूदा हालात को समझाने की कोशिश करता हूं। वह वर्ष 1991 की 24 जुलाई थी। तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने उस दिन जो परिवर्तनकारी बजट पेश किया था, उसके शुरुआती और समापन अंश आज तक स्मृति में रह बचे हैं। उनके आरंभिक शब्द थे- एक महान आर्थिक शक्ति के रूप में भारत के उभरने का समय अब आ गया है। सिंह का आखिरी वाक्य था- दुनिया की कोई भी ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती, जिसका समय आ गया हो। यकीनन, वह अर्थव्यवस्था के बंद पड़े दरवाजों को खोलने के साथ उम्मीदों के दरख्त रोपने की कोशिश कर रहे थे। वजह? सदन का माहौल अच्...