कुशीनगर, मार्च 9 -- कुशीनगर। ऐ मोमिनों तुम पर रमज़ान के रोज़े फ़र्ज़ कर दिए गए। जिस तरह तुम से पहले लोगों पर फ़र्ज़ किए गए थे, ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ। क्योंकि रमज़ान वह मुबारक़ महीना है, जिसमें कुरआन शरीफ़ नाज़िल हुआ। ये बातें मदरसा मोआज़ बिन ज़बल बतरौली बाजार के मौलाना सरफ़राज़ अहमद क़ासमी ने कहीं। उन्होंने कहा कि ऐ मोमिनों, तुम में से जो शख्स इस महीने को पाए तो उसे चाहिए कि रमज़ान के पूरे रोज़े रखे। उस शख्स के लिए हलाकत है, जिसने रमजान का महीना पाया और अपने गुनाहों की बख्शीश व माफी ना पा सके। पूरे रमज़ान अल्लाह तआला हर रोज़ इफ्तार के वक्त लोगों को जहन्नम से आजाद करता है। रमज़ान का पूरा महीना मोमिनों के लिए ख़ुदा की तरफ से अज़मत, रहमत और बरकतों से लबरेज़ है। रोज़ेदार जब रोज़े की हालत में पूरे दिन भूखा-प्यासा रहकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहता है, भूख-प्यास ...
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