कानपुर, जनवरी 13 -- कानपुर देहात। किसानों के हितैषी होने और उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने का सरकार दावा कर रही है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और है। कभी बोरों की कमी तो कहीं धान की उठान न होने की बात कहकर धान की तौल नहीं हो पा रही है। इससे सरकार की मंशा के बावजूद सिस्टम की नाकामी सामने आ रही है। सर्दी में घर परिवार छोड़ किसान हफ्तों से क्रय केन्द्रों पर धान बिकने की आस में डेरा डाले हैं। जिले में इस साल 2369 रुपये प्रति कुंतल की दर 68000 एमटी धान की खरीद होनी है। इसके लिए पांच एजेंसियों के 56 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन पंजीकरण कराने वाले 16912 किसानों में अभी तक सिर्फ 6882 किसानों से ही खरीद हो पाई है। जबकि आनलाइन पंजीकरण कराने व खाता सत्यापन के बाद भी धान बेचने के लिए किसान क्रय केंद्रों पर डेरा डाले हें। किसानों का आरोप है कि तौल कराने ...
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