लखनऊ, जून 30 -- जो दिल खुदा पाक के डर से कांपता नही, इससे किसी नेकी की उम्मीद नही हो सकती। हजरत उस्मान गनी खौफे खुदा से रोते रहते, मौत, कब्र का ख्याल हमेशा उनको पकडे़ रहता। ये बातें मौलाना मुफ्ती अतीकुर्रहमान ने दारूल उलूम फरंगी महल में इस्लामिक सेन्टर के अन्तर्गत दस दिवसीय जलसे शुहादा-ए-दीन-हक व इस्लाह-ए-मुआशरा के तहत तीसरे जलसे में कहीं। मौलाना अतीकुर्रहमान ने कहा कि तीसरे खलीफा हजरत उस्मान के अंदर शर्म व हया बहुत थी। मौलाना ने कहा कि हजरत उस्मान गनी मुसीबतों को निहायत सब्र व सुकून के साथ बर्दाश्त करते थे। शहादत के मौके़ पर चालीस दिन तक जिस सूझ बूझ, जब्त का इजहार किया वह अपने आप में एक उदाहरण है। जलसे का संचालन मौलाना मो शमीम ने किया। मसिजद एक मिनारा अकबरी गेट में दस दिवसीय शोहदाऐ किराम का तीसरा जलसा यौमे उसमाने गनी हुआ। मौलाना कारी मोह...
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