वाराणसी, नवम्बर 21 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। बांके बिहारी के अनन्य भक्त स्वामी हरिदास देव ने सखी संप्रादय का प्रवर्तन किया था। ललिता सखी के अवतार माने जाने वाले स्वामी हरिदास देव को 'रसिक चक्र चूड़ामणि' की उपाधि दी गई थी। इसका अर्थ है जो ईश्वर के प्रेमपूर्ण रूप का आनंद लेता है। ये बातें वृंदावन में गोरीलाल कुंज श्रीधाम के महंत स्वामी किशोरदास देव ने कहीं। वह दुर्गाकुंड स्थित श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय में भक्तमाल कथा के चौथे दिन गुरुवार को प्रवचन कर रहे थे। संकटमोचन संकीर्तन मंडल की ओर से हो रहे आयोजन में कथा व्यास ने कहा कि स्वामी हरिदास महाराज ने श्रीराधामाधव के युगल स्वरूप को निहारने का एक अलग ही मार्ग सुझाया है। उन्होंने जिस रसमयी नित्यविहारोपासना का सिद्धांत प्रतिपादित किया वह अनुपम एवं अलौकिक है। उन्होंने कहा कि प्रेम ...