कानपुर, नवम्बर 27 -- कानपुर। स्वामी नारदानंद सरस्वती महाराज के जन्मदिवस पर उद्बोधन समिति के 58 महाधिवेशन के अंतर्गत संत सम्मेलन आयोजित हुआ। वृंदावन से डॉ.नारायणानंद महाराज पधारे। गुरु महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक ज्ञान, भक्ति, प्रेम और निस्वार्थ सेवा में निहित है। वे अपनी उपस्थिति से सुख और शांति प्रदान करते हैं, लोगों के पाप और अज्ञानता को धोते हैं, और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा गुरु की महिमा इस बात से भी समझी जा सकती है कि वे सभी के प्रति समान दृष्टि रखते हैं, जाति, पंथ और परंपराओं के बंधनों से मुक्त होते हैं। हमारे गुरुदेव भगवान स्वामी नारदानंद जी ने हमेशा मानव निर्माण का कार्य किया उन्होंने कभी भेदभाव नहीं किया वह हमेशा कहते थे कि मानव की दो जातियां हैं सज्जन और दुर्जन। स्वामी रामानंद आश्रम ने ...