बागपत, फरवरी 2 -- बड़ौत। शहर के अजितनाथ सभागार में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री विमर्श सागर महाराज ने कहा कि अध्ययन का अर्थ पठन जबकि स्वाध्याय का अर्थ आचरण है। बुद्धि को विकसित करने,शुभ अध्यवसाय, उत्कृष्ट संवेग, तपश्चरण की वृद्धि,स्वयं के दोषों को दूर करने के लिए शास्त्र का स्वाध्याय करना चाहिये। अगर शास्त्र का अध्ययन करने के उपरान्त आचरण में बात नहीं आती, तो इसका स्वाध्याय बंजर भूमि में बीज डालने के समान निरर्थक है। धर्म सभा में मुकेश जैन,प्रदीप जैन,जितेंद्र जैन, विनोद जैन,वरदान जैन,मदन लाल जैन आदि उपस्थित थे।

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