वाराणसी, जनवरी 9 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने युवाओं का आह्वान किया कि वह महामना के चरित्र को आत्मसात कर अपने भीतर सकारात्मक बदलाव लाएं। बीएचयू स्थित स्वतंत्रता भवन सभागार में गुरुवार को सेवाज्ञ संस्थानम की तरफ से आयोजित महामना महोत्सव पखवारा के समापन समारोह में वह युवाओं को संबोधित कर रहे थे। आचार्य ने कहा कि आदर्श यह नहीं बताता कि क्या होना चाहिए, बल्कि यह बताता है कि हम वास्तव में कैसे हैं। आदर्श का एक पर्याय 'दर्पण' है, जिसमें हम स्वयं को देखते हैं। उन्होंने कहा कि साधनहीनता और अनेक बाधाओं के बावजूद महामना जी ने महासेतु के निर्माण की तरह काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया। जोर दिया कि आधुनिक होने का अर्थ परंपराओं का विनाश नहीं, बल्कि उन्हें आत्मसात करते हुए आगे बढ़ना ह...