मुजफ्फरपुर, दिसम्बर 5 -- मुजफ्फरपुर। बिना दवा के रोगमुक्त करने वालीं चिकित्सा पद्धतियां और इनसे जुड़े चिकित्सकों को वह मुकाम नहीं मिल पा रहा है, जो अन्य चिकित्सा पद्धतियों ने आज सरकार के सहयोग से हासिल किया है। प्रोत्साहन और प्रचार- प्रसार के अभाव में ये पिछड़ रही हैं। न्युरोथेरेपी, एक्युप्रेशर और फिजियोथेरेपी जैसी चिकित्सा पद्धतियों से लोगों का इलाज करने वाले शहर के चिकित्सकों में सरकारी उदासीनता से गहरी निराशा है। इनका कहना है कि शहर में आज इन विधाओं के गिने-चुने डॉक्टर हैं। सरकारी अस्पतालों में वर्षों से बहाली नहीं हुई है। युवा पीढ़ी इस क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहती है, लेकिन उनके प्रोत्साहन और प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं है। इन चिकित्सकों को एक ऐसे 'स्पर्श' की जरूरत है, जिससे इनका कायाकल्प हो सके। मुजफ्फरपुर जिले में एलोपैथ, होमियोपैथ...