नई दिल्ली, जनवरी 4 -- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने डीप-टेक स्टार्टअप्स को विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के नियमों में ढील दी है। विभाग के 42वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि डीप-टेक स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देने के लिए लागू तीन साल की व्यवहार्यता (वायबिलिटी) शर्त को हटा दिया गया है। इसके तहत अब स्टार्टअप्स को विभाग की औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत एक करोड़ रुपये तक की सहायता पाने के लिए तीन साल तक टिकाऊ और व्यवहार्य होने की अनिवार्यता नहीं होगी।

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