देवघर, जनवरी 14 -- सारठ प्रतिनिधि। आदिवासियों का महापर्व सोहराय शुरू होने के साथ आदिवासी गांवों में मांदर की थाप पर आदिवासी युवक-युवतियों को थिरकते देखा गया। आदिवासियों का महापर्व सोहराय समुदाय द्वारा उत्सव के साथ मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन पर्व की समाप्ति होती है। महापर्व सोहराय को लेकर आदिवासियों द्वारा अपने घरों की साफ-सफाई की जाती है। आदिवासी महिलाओं, युवतियों द्वारा संस्कृति के अनुरूप काले व सफेद मिट्टी से घरों को आकर्षक रूप प्रदान किया जाता है। पर्व के संबंध में सुशील सोरेन, काया सोरेन आदि ने बताया कि सोहराय पर्व में नये चावल से निर्मित हंडिया का सबसे अधिक महत्व होता है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है, वहीं प्रकृति के प्रति श्रद्धा व धर्म के प्रति अटूट आस्था का द्योतक भी है। फसल काटने के साथ मनाए जाने वाले महापर्व मे...