कटिहार, दिसम्बर 15 -- कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि नववर्ष की शुभकामनाएं अब मोबाइल की स्क्रीन पर चमकती हैं। एक क्लिक, एक मैसेज और सैकड़ों लोग जुड़ जाते हैं। लेकिन इसी तेज़ रफ्तार डिजिटल दुनिया में कहीं पीछे छूट गई हैं वे ग्रीटिंग कार्डों की यादें, जिनसे कभी नए साल की शुरुआत हुआ करती थी। समय बदला है, तकनीक आगे बढ़ी है, मगर भावनाओं की वह धीमी और सुकून भरी अभिव्यक्ति अब दुर्लभ हो गई है। जब इंतजार भी एक उत्सव था दो-तीन दशक पहले नवंबर-दिसंबर आते ही बाजारों में रंग-बिरंगे ग्रीटिंग कार्ड सजने लगते थे। लोग हफ्तों पहले अपने प्रियजनों के लिए कार्ड चुनते थे। डाक से आने वाले हर लिफाफे का इंतजार उत्सव जैसा लगता था। डाकिए की साइकिल की घंटी सुनते ही मन में उम्मीद जगती थी कि शायद इस बार किसी खास का संदेश आया हो। शब्दों में बसती थी रिश्तों की गर्माहट उस द...
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