नई दिल्ली, नवम्बर 17 -- हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण समय प्रदोष काल माना जाता है, जो सूर्यास्त से कुछ समय पहले से सूर्यास्त से कुछ समय बाद तक रहता है। इसी अवधि में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। आज यानी 17 नवंबर को मार्गशीर्ष माह का पहला प्रदोष व्रत है। सोमवार और प्रदोष- दोनों शुभ संयोग एक साथ पड़ने के कारण इस व्रत का महत्व कई गुना बढ़ गया है। मान्यता है कि सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत रखने पर दोगुना फल मिलता है। शास्त्रों में कहा गया है कि प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। बिलपत्र, गंगाजल,...
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