नई दिल्ली, नवम्बर 15 -- छोटी-छोटी उपलब्धियों के लिए बड़े-बड़े इश्तिहार देने के इस दौर में अचानक जब कोई ऐसा नाम सामने आता है, जो बड़ी खामोशी से किसी बड़े काम को अंजाम दे रहा हो, तो उसके प्रति गहरे सम्मान का भाव उपजना स्वाभाविक है। इसीलिए बीते 13 नवंबर को जब त्रिवेणी आचार्य को प्रतिष्ठित जमनालाल बजाज सम्मान से सम्मानित किया गया, तो उनके कामों के बारे में जानकर उन पर गर्व हो आया। आज से करीब 62 साल पहले गुजरात में पैदा हुई त्रिवेणी एक आम लड़की की तरह खुदमुख्तार बनने के सपने के साथ बड़ी हुईं। शादी की उम्र हुई, तो घरवालों ने एक फौजी लड़के का इंतिखाब किया। पति बालकृष्ण आचार्य काफी सुलझे हुए शख्स थे, त्रिवेणी को अपने सपनों को जीने का पूरा मौका मिला। सेना की 15 साल की नौकरी के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर पति इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के होलसेल का अ...
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