मुंगेर, फरवरी 9 -- मुंगेर, एक संवाददाता। सेवा विस्तार मिलने के बावजूद अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विश्वविद्यालय की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। विश्वविद्यालय द्वारा अतिथि शिक्षकों को उनके पुराने कॉलेजों से हटाकर अन्य कॉलेजों में पदस्थापित किया गया, जिससे असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। बताया जा रहा है कि, कुछ अतिथि शिक्षकों को नए कॉलेजों में नियुक्ति दिए जाने के बाद पुनः उन्हें उनके पूर्ववर्ती कॉलेजों में ही भेज दिया गया। इस तरह की अदला-बदली से न केवल शिक्षकों में भ्रम की स्थिति बनी, बल्कि विश्वविद्यालय की नियुक्ति नीति की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं। जानकार कह रहे हैं कि, इस तरह से नियुक्ति एवं स्थानांतरण का खेल तो प्रशासनिक महकमे में होता है। कहीं यही खेल विश्वविद्यालय में भी तो नहीं खेला जा रहा ह...
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