जमुई, फरवरी 23 -- झाझा, निज प्रतिनिधि सूखते जलाशय व नदियों से मनुष्य पर तो असर हो ही रहा है, पशुओं को भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। दुधारू मवेशी भैंस को पानी में घंटों रहना तथा तैरना पसंद है। पशुपालक भी भैंस को जलाशय व नदियों में ही नहाते व सफाई करते हैं। अब नदियां सूखने व पानी बहुत ही कम रह जाने के कारण पशुपालक भैंस को बथान पर ही मोटर पंप से पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कर नहाते हैं। इसमें भूमिगत जल की खपत अधिक होने के साथ ही बस किसी तरह काम भर चलाया जाता है। जबकि भैंस की प्रव़ृति झुंड के साथ पानी में बैठे रहना तथा तैरना होता है। पर्याप्त पानी नहीं मिल पाने के कारण भैंस के दूध देने की क्षमता में भी कमी आती है। इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर होता है। यही स्थिति अन्य दुधारू मवेशी, पशु व पक्षियों की भी होती है। गर्मी के मौसम में तो ...
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