नई दिल्ली, मई 21 -- सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में न्यायिक सेवाओं में प्रवेश की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए लॉ ग्रेजुएट्स को एंट्री-लेवल जज की परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की 20 साल पुरानी परंपरा को समाप्त कर दिया है। अब केवल वही उम्मीदवार प्रथम श्रेणी न्यायिक अधिकारी (Civil Judge/Judicial Magistrate) पदों के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने कम से कम तीन वर्षों के लिए वकालत की है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति एजी मसीह और के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने इस निर्णय में कहा, "न्यायिक अधिकारी नियुक्ति के पहले दिन से ही नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति और प्रतिष्ठा से जुड़े गंभीर मामलों से निपटते हैं। केवल किताबों से प्राप्त ज्ञान या नौकरी से पूर्व की ट्रेनिंग कोर्ट में मिलने वाले...
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