प्रयागराज, मई 25 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता के मामले में आदेश न देकर केस लटकाए रखने पर नाराजगी जताई है। कहा कि रजनीश बनाम नेहा के केस में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि पति-पत्नी दोनों की संपत्ति व दायित्व का हलफनामा लेकर गुजारा भत्ता तय किया जाए, लेकिन प्रदेश के पारिवारिक न्यायालयों द्वारा इसका पालन नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ता मामले की कार्यवाही संक्षिप्त विचारण प्रक्रिया है और ऐसी अर्जी पर 70 से 80 बार सुनवाई की तारीख लग रही है। आगरा, प्रयागराज व महाराजगंज के प्रधान पारिवारिक न्यायालयों में डेढ़ हजार से दो हजार तथा अपर पारिवारिक न्यायाधीश के समक्ष पांच सौ से छह सौ ऐसे केस लंबित हैं, जिनमें गुजारा भत्ता का आदेश दिया जाना है। कोर्ट ने महानिबंधक को प्रकरण को मुख्य न्यायाधीश के समक...
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