सुपौल, नवम्बर 6 -- त्रिवेणीगंज, निज संवाददाता। प्रखंड के लगभग अधिकांश पंचायतों में बनाए गए बाढ़ आश्रय स्थल भवन जर्जर हो गए हैं। कुशहा त्रासदी के दौरान सरकार द्वारा कोसी क्षेत्र में जानमाल की व्यापक क्षति को देखते हुए करोड़ों की लागत से जगह-जगह बाढ़ आश्रय स्थल का निर्माण कराया गया था, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति आने पर लोगों को आश्रय के लिए भटकना नहीं पड़े। लगभग एक करोड़ की लागत से निर्मित आश्रय स्थल पर मवेशियों को रखने का भी इंतजाम किया गया था। निर्माण के दौरान ही लोगों में गड़बड़ी को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। विडंबना यह रही की निर्माण कार्य पूरा होने के चंद वर्षों बाद ही इसका अस्तित्व मिटने लगा। अमूमन सभी जगह पर आश्रय स्थल का फ़र्ज़ धंस गया है। मवेशियों का शेड तेज आंधी-हवा, मूसलाधार पानी का झोंका बर्दाश्त नहीं कर पाया। रही-सही कसर लोगों ने...
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