सुपौल, नवम्बर 5 -- सुपौल, एक प्रतिनिधि। महापर्व छठ के बाद से ही जिले के हर घर आंगन में सामा चकेवा के गीतों से गूंज रहा था। इस दौरान कार्तिक पूर्णिमा की बुधवार को चांदनी रात बहनों ने सामा चकेवा की मूर्तियों को नदियों, तालाब और खाली जोत की हुई खेतों में विसर्जित की। मिथिलांचल और कोसी में बहनें उत्साहपूर्वक सामा-चकेवा पर्व मनातीं हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण और जांबवती की एक बेटी सामा और बेटा चकेवा था। सामा के पति का नाम चक्रवाक था। एक बार चुड़क ने सामा के ऊपर वृंदावन में ऋषियों के संग रमण करने का गलत आरोप भगवान श्री कृष्ण के सामने लगाया था। इससे श्री कृष्ण क्रोधित होकर सामा को पक्षी बनने का श्राप दे देते हैं। श्राप के बाद सामा पंछी बनकर वृंदावन में उड़ने लगती है। अपनी बहन को वापस मनुष्य रूप में पाने के लिए चकेवा भगवान ...