उरई, जनवरी 27 -- जालौन। औरैया रोड स्थित सतीशचंद्र मिश्रा के आवास पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर कथा व्यास अनिल त्रिपाठी महाराज ने सुदामा चरित का वर्णन किया। कथा व्यास अनिल त्रिपाठी महाराज ने कहा कि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता सांसारिक स्वार्थ से परे थी। सुदामा निर्धन होने के बावजूद अपने मित्र श्रीकृष्ण से कभी कुछ मांगने नहीं गए बल्कि उनके मन में केवल प्रेम और श्रद्धा थी। उन्होंने बताया कि जब सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर द्वारका पहुंचे तो श्रीकृष्ण ने उन्हें राजसी सम्मान दिया और अपने मित्र के चरण धोकर आदर्श मित्रता का उदाहरण प्रस्तुत किया। सुदामा का जीवन सिखाता है कि सच्ची मित्रता धन, वैभव और पद से नहीं बल्कि निःस्वार्थ भाव और विश्वास से होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा से कुछ मांगे बिना ही उनकी गरीबी को दूर कर दिया...