बागपत, जुलाई 5 -- आचार्य नयन सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म में कभी सुख की कल्पना नहीं करनी चाहिए। सुख तो जन्म से भगवान के जीवन में भी नहीं होता। वे शुक्रवार को कौशल भवन सभागार में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन कर रहे थे। आचार्य नयन सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म में कभी सुख की कल्पना नहीं करनी चाहिए। सुख तो जन्म से भगवान के जीवन में भी नहीं होता। दुख को सहने की आदत बनाओ, दुख सहने से व्यक्ति हल्का होता है। मंदिर में पत्थर कितना भी सस्ता लगा हो, लेकिन सर झुकाने को मन अवश्य करता है। उन्होंने कहा कि सुख-दुख का कारण तो मन है, मन सुख-दुख की कल्पना कर लेता है। जीवन में जितने क्षण धर्म के साथ रहोंगे, जीवन उतने क्षणों के लिए उच्चतम आयामों को प्राप्त करता चला जाता है। जब तक हम मुस्कुराते हुए इसे अपने आचरण में नहीं लाते तब तक यह पुरुषार्थ है। आचा...
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