गया, अगस्त 16 -- आज के आधुनिक दौर में देश का परिदृश्य बड़ी तेजी से बदल रहा है जिसकी वजह से भारत के प्राचीन परंपरागत खेल भी विलुप्त होते जा रहे हैं। दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) अपने परिसर में इस अकादमिक सत्र से भारतीय खेल पखवाड़ा ''भारत के परंपरागत खेलों का टूर्नामेंट'' आयोजित करने जा रहा है। ये बातें टूर्नामेंट के उद्घाटन करते हुए सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहीं। कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में पठन - पाठन के साथ - साथ खेलों को विशेष रूप से तरजीह दी गई और इसी दिशा में सीयूएसबी ने यह कदम उठाया है। 15 दिवसीय आयोजन के तहत रस्साकशी, पिट्ठू, पुच्ची - पुच्ची, पतंगबाजी, गिट्टे, गिल्ली डंडा, लट्टू कताई, मटकाफोड़, कांच कौड़ी, लंगड़ी, कंचा, बिच्छू पानी, कोड़ा जमाल के साथ भारत की समृद्ध खेल संस...
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