जौनपुर, फरवरी 17 -- शाहगंज, हिन्दुस्तान संवाद। नगर के रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथा व्यास राजन महाराज ने सीता स्वयंवर प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और ओजस्वी वर्णन किया। उनके भावपूर्ण शब्दों ने श्रद्धालुओं को त्रेतायुग की उस पावन बेला में पहुंचा दिया। जब मिथिला की धरती पर भगवान श्रीराम और माता सीता का दिव्य मिलन हुआ था। कथा के दौरान सिया राम मय सब जग जानी और जय श्रीराम के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठा। राजन महाराज ने बताया कि मिथिला नरेश राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए भव्य स्वयंवर का आयोजन किया था। स्वयंवर की शर्त थी कि जो वीर भगवान शिव के दिव्य धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता का वरण करेगा। महाराज ने विस्तार से वर्णन किया कि स्वयंवर सभा में देश-विदेश के पराक्रमी राजा उपस्थित हुए। परंतु कोई भ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.